प्रथम विश्व युद्ध से कारगिल तक: शौर्य और बलिदान की मिसाल, नागौर के हर गांव में है सेना का गौरवशाली इतिहास
राजस्थान के हृदय स्थल में स्थित नागौर जिला अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के साथ-साथ देश सेवा के जज्बे के लिए भी विख्यात है। यह जिला भारतीय सेना में जवानों की भर्ती और बलिदान के मामले में अग्रणी रहा है। नागौर के ग्रामीण क्षेत्रों में देशप्रेम की भावना इतनी गहरी है कि यहां शायद ही कोई ऐसा गांव मिले, जहां का कोई युवा सेना में कार्यरत न हो। कई गांवों की तो यह विशेषता है कि वहां के लगभग प्रत्येक घर से एक जवान देश की सेवा में समर्पित है। स्वतंत्रता संग्राम से लेकर प्रथम विश्व युद्ध और हालिया कारगिल जैसे अभियानों तक, नागौर के सैनिकों ने अपनी बहादुरी का लोहा मनवाया है। जिले के चौराहों और सार्वजनिक स्थानों पर स्थापित शहीदों की प्रतिमाएं आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों का स्मरण कराती हैं और बलिदान की अमर गाथाएं सुनाती हैं। भारतीय सेना दिवस के अवसर पर, नागौर की यह गौरवशाली सैन्य परंपरा पूरे राष्ट्र के लिए गर्व का विषय है।
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