स्थानीय📍भीलवाड़ा21 जनवरी, 2026

भीलवाड़ा का मिनी फूड पार्क बजट घोषणाओं के जाल में फंसा: तीन साल बाद भी सिर्फ चार पत्थर!

राजस्थान सरकार की महत्वाकांक्षी बजट घोषणाओं का हाल भीलवाड़ा जिले में देखा जा सकता है, जहां मांडल तहसील के ग्राम सिडियास में प्रस्तावित मिनी फूड पार्क तीन साल बाद भी कागजी कार्यवाही के 'कांटों' में उलझा हुआ है। वर्ष 2022-23 के बजट में घोषित इस परियोजना के लिए आवंटित 100 बीघा बेशकीमती जमीन पर अब तक केवल चारों कोनों पर पत्थर गड़े हैं। प्रशासनिक शिथिलता का आलम यह है कि जमीन की लीज डीड तैयार नहीं हो पाई है, और न ही सुरक्षा के लिए तारबंदी (वायर फेंसिंग) का काम शुरू हो सका है। सुरक्षा मंजूरी में देरी: मंडी समिति ने जमीन पर चारदीवारी के लिए एस्टीमेट तैयार करवाकर अगस्त और नवंबर 2022 में ही कृषि विपणन निदेशालय, जयपुर को भेज दिए थे, लेकिन जून 2025 में दोबारा पत्र भेजने के बावजूद निदेशालय से अभी तक स्वीकृति नहीं मिली है। इस प्रशासनिक विलंब के चलते करोड़ों की यह जमीन निष्क्रिय पड़ी है। एक्शन प्लान का अभाव: हालांकि मिनी फूड पार्क की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) विभाग को मिल चुकी है, लेकिन साइट पर काम शुरू करने के लिए आवश्यक 'एक्शन प्लान' तैयार नहीं किया गया है। विभाग अभी तक यह तय नहीं कर पाया है कि यहां किस प्रकार के और कितने उद्योग स्थापित किए जाएंगे, जिससे निवेशकों को आकर्षित करने में मुश्किल आ रही है। भीलवाड़ा मंडी समिति के सचिव मदनलाल सैनी ने आश्वासन दिया है कि निदेशालय से मंजूरी मिलते ही काम शुरू होगा और उम्मीद है कि इस वित्तीय वर्ष में प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। पत्रिका व्यू: इस फूड पार्क का उद्देश्य जिले में कृषि आधारित प्रसंस्करण इकाइयों का जाल बिछाकर किसानों को बेहतर दाम दिलाना और युवाओं को रोजगार देना था, लेकिन अधिकारियों की धीमी गति के कारण सरकार की मंशा धरातल पर दम तोड़ रही है, जिससे निवेश और रोजगार दोनों दांव पर हैं।
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