जैन मुनि का कड़ा प्रहार: 'हमारी शिक्षा नीति दुनिया में सबसे खराब है', संस्कारों की बलि चढ़ रहा बचपन!
जयपुर में हाल ही में एक स्कूली छात्रा द्वारा तनाव के कारण आत्महत्या करने की हृदय विदारक घटना ने पूरे समाज को झकझोर कर रख दिया है और आधुनिक जीवनशैली तथा शिक्षा प्रणाली पर गंभीर बहस छेड़ दी है। भीलवाड़ा में संबोधित करते हुए जैन मुनि आदित्य सागर ने भारतीय शिक्षा व्यवस्था पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि हमारी शिक्षा नीति दुनिया में सबसे खराब है क्योंकि यह संस्कारों से पूरी तरह कट चुकी है और केवल कागजी डिग्रियां बांटने का काम कर रही है, जबकि जीवन जीने की कला सिखाने में विफल रही है।
मुनि आदित्य सागर ने आगाह किया कि यदि समाज आधुनिकता की इस अंधी दौड़ से बाहर निकलकर आध्यात्मिकता की ओर नहीं मुड़ा, तो 6जी जैसी भविष्य की तकनीकें भी महामारी से अधिक घातक साबित हो सकती हैं। बच्चों में बढ़ते तनाव के मूल कारण पर बात करते हुए मुनि ने कहा कि स्कूलों और अभिभावकों द्वारा 'ध्यान' (मेडिटेशन) के महत्व को त्यागने से बच्चे साक्षर तो बन रहे हैं, लेकिन संस्कारित नहीं हो पा रहे हैं। उन्होंने आलोचना करते हुए कहा कि पिछली पीढ़ी में तीसरी-चौथी पास व्यक्ति भी व्यवहारिक ज्ञान के कारण सफल होता था, जबकि आज 12वीं पास होना भी साक्षरता का पैमाना बन गया है।
तकनीक के संदर्भ में उन्होंने कहा कि इसने सुविधाओं के नाम पर मानवता को कमजोर किया है, जैसे फोन अब शरीर का अभिन्न अंग बन गया है। इसके अलावा, मुनि ने पर्यावरण संरक्षण पर जोर देते हुए जैन दर्शन को इसका असली मार्ग बताया। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी के भटकने के लिए माता-पिता जिम्मेदार हैं, जो 'लिबरल' होने के नाम पर बच्चों को संस्कार देने वाली संगत से दूर कर रहे हैं और पढ़ाई के नाम पर उन्हें हॉस्टल भेजकर संस्कारों की बलि चढ़ा रहे हैं।
#शिक्षा नीति#जैन मुनि आदित्य सागर#छात्र तनाव#संस्कार#आधुनिकता
