स्थानीय📍नागौर21 जनवरी, 2026

नागौर की उच्च शिक्षा पर संग्राम: तेज हो रही विश्वविद्यालय और इंजीनियरिंग कॉलेज की मांग, छात्राओं की बड़ी समस्या

राजस्थान के नागौर जिले में विश्वविद्यालय और इंजीनियरिंग कॉलेज की स्थापना की मांग ने जोर पकड़ लिया है, जिसे लेकर राजस्थान पत्रिका द्वारा चलाया जा रहा जन-अभियान सफल होता दिख रहा है। इस अभियान को स्थानीय कॉलेज छात्रों, शिक्षकों और नागरिकों का मजबूत समर्थन मिल रहा है। बीआर मिर्धा कॉलेज में हस्ताक्षर अभियान के दौरान, श्रीमती माडीबाई मिर्धा कन्या महाविद्यालय की सहायक आचार्य माया जाखड़ सहित कई शिक्षकों ने हस्ताक्षर कर इस मांग को मजबूती दी। शिक्षकों ने उच्च शिक्षा संस्थानों की कमी पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि नागौर की प्रतिभाशाली छात्राओं को अक्सर कम अंक मिल रहे हैं, कई बार तो पासिंग मार्क्स भी नहीं मिल पाते, जबकि उन्होंने 12वीं कक्षा 95% से उत्तीर्ण की होती है। छात्राओं के लिए हर बार अजमेर जाकर पढ़ाई करना या परीक्षा संबंधी कार्य निपटाना अत्यंत महंगा और समय की बर्बादी है, जिससे उनका परिणाम प्रभावित हो रहा है। शिक्षकों ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के लक्ष्यों का हवाला देते हुए कहा कि उच्च शिक्षा में नामांकन बढ़ाने के लिए स्थानीय संस्थान जरूरी हैं। उन्होंने सरकार से आगामी बजट 2026-27 में नागौर को विश्वविद्यालय और इंजीनियरिंग कॉलेज की सौगात देने की पुरजोर अपील की है। समर्थकों का मानना है कि नागौर प्रदेश का एक बड़ा जिला है, जहां लाखों विद्यार्थी उच्च शिक्षा के लिए अन्य जिलों पर निर्भर हैं। विश्वविद्यालय की कमी के कारण उन्हें अजमेर तक यात्रा करनी पड़ती है, जो एक बड़ी असुविधा है। इसके अतिरिक्त, शिक्षक सुनील बुगासरा ने नागौर जिले के दुग्ध उत्पादन में सातवें स्थान पर होने के कारण वेटरनरी कॉलेज खोलने की भी मांग उठाई है।
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