नागौर में गूंजेगी देलवाड़ा की गूंज: चंद्रप्रभ स्वामी जैन मंदिर का हो रहा भव्य कायाकल्प
नागौर शहर में रेलवे स्टेशन स्थित ऐतिहासिक श्री चंद्रप्रभ स्वामी जैन मंदिर को भव्यता और कलात्मकता के नए शिखर पर ले जाया जा रहा है। इस लगभग 90 वर्ष पुराने मंदिर का जीर्णोद्धार और सौंदर्यीकरण विश्व प्रसिद्ध माउंट आबू के देलवाड़ा जैन मंदिरों की शैली में किया जा रहा है। इस कार्य में संगमरमर पर अत्यंत बारीक और आकर्षक नक्काशी शामिल है, जिसे ओडिशा से आए विशेष कुशल कारीगर अंजाम दे रहे हैं।
यह मंदिर मूल रूप से सुखलाल, बादरमल एवं कानमल समदङिया परिवार द्वारा स्थापित किया गया था और परिवार ही इसका संचालन संभालता आ रहा है। जैन आचार्य नित्यानंद सूरीश्वर की प्रेरणा से इस बार मंदिर में परिकर (मूल प्रतिमा के चारों ओर की सजावटी आकृति) स्थापना के साथ यह नक्काशी कार्य शुरू किया गया है। परिकर स्थापना के बाद, भगवान चंद्रप्रभ स्वामी की प्रतिमा अब सिद्ध अवस्था से अरिहंत अवस्था में सुशोभित हो गई है, जिसमें देवी-देवताओं की सुंदर आकृतियां भी जोड़ी गई हैं।
समदङिया परिवार के अभय कुमार ने बताया कि यह भव्य नक्काशी कार्य पिछले छह महीनों से निरंतर जारी है और इसे पूर्ण होने में आगामी दो से तीन वर्षों का समय लग सकता है। आगामी 7 फरवरी से शुरू होने वाले तीन दिवसीय ध्वजा महोत्सव के लिए मंदिर को विशेष रूप से सजाया जा रहा है, जिसमें पुष्कर के फूलों और अहमदाबाद के कलाकारों द्वारा तैयार की जाने वाली रंगोली का उपयोग होगा। इस महोत्सव में देश-विदेश से जैन धर्मावलंबी शामिल होंगे, जिसके उपलक्ष्य में भव्य वरघोड़ा और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। यह जीर्णोद्धार नागौर को जैन संस्कृति और स्थापत्य कला का एक प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
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