स्थानीय📍नागौर21 जनवरी, 2026

मनरेगा का भरोसा टूटा: नागौर में लाखों जॉब कार्ड, पर सिर्फ 5% परिवारों को ही मिला 100 दिन का रोजगार!

नागौर जिले में ग्रामीण परिवारों को सालाना 100 दिन का रोजगार सुनिश्चित करने वाली महात्मा गांधी नरेगा (मनरेगा) योजना की जमीनी हकीकत सरकारी दावों से कोसों दूर दिखाई दे रही है। वित्तीय वर्ष 2024-25 के आंकड़ों के अनुसार, जिले में कुल 6 लाख 60 हजार जॉब कार्ड पंजीकृत थे, लेकिन इनमें से मात्र 5 प्रतिशत परिवारों (26,086) को ही पूरा 100 दिन का काम नसीब हुआ। जिले में सक्रिय जॉब कार्डों की संख्या 5 लाख 22 हजार थी, फिर भी रोजगार गारंटी का यह आंकड़ा निराशाजनक है। इसके अलावा, जिले में लगभग 65 हजार जॉब कार्ड ऐसे हैं जिन पर चालू वित्तीय वर्ष में एक दिन का काम भी दर्ज नहीं हुआ है, जो योजना के प्रभावी क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े करता है। जिला परिषद के सीईओ अरविंद जाखड़ ने आश्वासन दिया है कि प्रावधानों के अनुसार सभी को काम दिया जाता है और यथासमय समीक्षा की जाती है। हालांकि, जमीनी हकीकत यह है कि अधिकांश ग्रामीण परिवारों को उम्मीद के विपरीत औसतन केवल 40 से 70 दिन का ही रोजगार मिल पाया है। कई पंचायतों में समय पर कार्य स्वीकृति न मिलने और मांग के बावजूद काम की उपलब्धता न होने के कारण श्रमिकों को रोजगार के लिए पलायन करना पड़ा है। ब्लॉक स्तर पर भी हालात लगभग समान बने हुए हैं, जहां शून्य कार्य वाले जॉब कार्डों की संख्या चिंताजनक बनी हुई है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार संकट गहराता जा रहा है।
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