विदेश भेजने की योजना में उलटा खेल: छात्र घटे, पर सरकारी खर्च आसमान पर!
राजस्थान सरकार द्वारा उच्च शिक्षा के लिए विद्यार्थियों को विदेश भेजने वाली 'स्वामी विवेकानंद स्कॉलरशिप फॉर एकेडमिक एक्सीलेंस योजना' (पहले राजीव गांधी स्कॉलरशिप) के आंकड़ों ने एक चौंकाने वाला तथ्य उजागर किया है। विधानसभा में दिए गए जवाब के अनुसार, विदेश अध्ययन के लिए भेजे गए छात्रों की संख्या में कमी आई है, लेकिन योजना पर होने वाला सरकारी व्यय बढ़ गया है।
वित्तीय वर्ष 2023-24 में इस योजना के तहत 427 छात्रों को विदेश अध्ययन के लिए भेजा गया था, जिस पर सरकार ने 59.63 करोड़ रुपये खर्च किए थे। इसके विपरीत, वर्ष 2024-25 में लाभान्वित होने वाले छात्रों की संख्या घटकर मात्र 238 रह गई, बावजूद इसके खर्च बढ़कर 99.68 करोड़ रुपये हो गया। इस प्रकार, दो वर्षों में कुल 665 छात्रों पर 159.31 करोड़ रुपये की भारी राशि व्यय की गई है।
सरकार ने योजना के लक्ष्यों में भी बदलाव किया है। 2024-25 के लिए विदेश अध्ययन का लक्ष्य 300 निर्धारित किया गया था, जिसमें 238 छात्र लाभान्वित हुए। साथ ही, देश के उच्च रैंकिंग संस्थानों में अध्ययन के लिए 200 का लक्ष्य था, जिसमें 103 छात्रों को सहायता मिली। योजना के तहत अब अर्हता परीक्षा में न्यूनतम 60 प्रतिशत अंक और विशिष्ट संस्थानों में प्रवेश अनिवार्य किया गया है, साथ ही चयनित अभ्यर्थियों से इंडेम्निटी बॉन्ड और गारंटी भी ली जा रही है।
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