स्क्रीन टाइम का कहर: राजस्थान के 47 हजार सरकारी स्कूली बच्चों की आंखें कमजोर!
राजस्थान के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के स्वास्थ्य पर डिजिटल उपकरणों का गंभीर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। पिछले साल शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित शाला स्वास्थ्य परीक्षण कार्यक्रम के तहत, 70 मापदंडों पर 75 लाख बच्चों का आकलन किया गया था, जिसमें यह तथ्य सामने आया कि 47,423 बच्चों की आंखें कमजोर हो गई हैं। मोबाइल फोन के अत्यधिक उपयोग के कारण बच्चों में आंखों का सूखापन (ड्राई आई सिंड्रोम), डिजिटल आई स्ट्रेन, सिरदर्द और धुंधलापन जैसी परेशानियां तेजी से बढ़ रही हैं।
इस गंभीर स्थिति को देखते हुए, स्कूल शिक्षा विभाग के शासन सचिव कृष्ण कुणाल ने दो महीने पहले सभी जिला कलेक्टरों को पत्र लिखकर इन बच्चों की नेत्र जांच विशेषज्ञों से करवाने और सहयोग से मुफ्त चश्मे वितरित करने के निर्देश दिए थे। हालांकि, दो महीने बीत जाने के बावजूद यह कार्य अभी तक पूरा नहीं हो पाया है, जिससे स्वास्थ्य अधिकारियों की उदासीनता उजागर होती है। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग और स्वयंसेवी संस्थाओं के सहयोग से इन बच्चों को जल्द से जल्द चश्मे देने की योजना है, जिसके लिए चिकित्सा विभाग ने स्कूलों को ब्लाइंडनेस चार्ट भी उपलब्ध कराए हैं ताकि आगे की प्रक्रिया सुचारू रूप से हो सके।
रिपोर्ट के अनुसार, जयपुर जिले में सबसे अधिक 4226 बच्चों की आंखें कमजोर पाई गई हैं, जबकि सलूम्बर में सबसे कम 335 मामले दर्ज किए गए। नागौर में भी 1327 बच्चों की आंखों की जांच में समस्या सामने आई है। माध्यमिक शिक्षा, नागौर के एडीईओ सुरेश कुमार सोनी के अनुसार, चिकित्सा विभाग से चार्ट वितरित किए जा चुके हैं और बच्चों की रिपोर्ट शाला दर्पण पर अपडेट होनी बाकी है, जिसके लिए दोबारा निर्देश दिए गए हैं।
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